How difficult to say ‘No’

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Hello Friends

It is not difficult to say, I am the public. Whenever a person comes to me from any work, I do any kind of work of that person without any obstruction without any nook and cranny. And later it becomes his habit, he starts coming again and again and I leave my work and do his work first, even if all my work stops.
But I do not say that person, and I drink the anger inside, so that the person does not feel bad!

And he goes after praising me a little, no one else like you, in this whole office
Whenever I come to you, you never say never. Thank you. And then the same procedure the next day.
People would start taking advantage of your goodness.
Because you don’t do them,

It is good to be well, but people start taking advantage of you. Do not say how difficult it is when your relatives ask you for help, and you know you cannot help them, but if you do not tell them then they should not feel bad. And to avoid the fear that you may not become distant in the relationship, you help them, but later you find yourself in trouble. You help your relative. But find yourself surrounded by difficulties.

We are taught from childhood that we should help others. A good person for others
Should be made. But when we grow up, people start taking advantage of this goodness, and we are knee deep inside.

Suppose your beloved friend calls you and says, “Man, go to watch movies today and you are spending time with your family sitting at home and you don’t want to go, and your friend says that the house stays daily.” Sometimes even walking with friends and now you get confused about who to say no to and to whom to say yes. If I refuse a friend, then he feels bad. If I go home with a friend to watch a movie, then the family feels bad. And you start cursing yourself without talking to anyone. And go to sleep silently in the room or start watching TV, and get angry inside you, then either take out your anger at home. Or get angry at a friend. If anything goes wrong, blame yourself, do not think you are impossible to say.

So what to do so that we can get out of all these problems.
First of all, stop thinking about others that if I do not tell them then they will feel bad. And a good image that has been made of me will become evil in their eyes.
Learn to say no, a confidence will come in you and you will be taught to stop cursing yourself. Saying no will not spoil your image. Rather people will stop taking advantage of you and you will be able to complete your work at the right time!
Hope you liked the post.

How difficult to say ‘No’

नमस्कार दोस्तों

न  कहना कितना मुश्किल होता  हैं,  में  जनता हूँ . जब  भी  कोई व्यक्ति  मेरे  पास   किसी  काम  से   आता  हैं  तो मैं  बिना  किसी   अवरोध  के  उस व्यक्ति  का किसी भी तरह का  काम  बिना  न  नुक्कड़  के  कर   देता हूँ . और बाद में उसकी आदत बन जाती हैं , वह बार बार आना  शुरू  कर  देता  हैं  और  मैं  अपना  जरुरी  काम छोड़कर  उसका  काम  पहले   कर  देता  हूँ , चाहे  मेरा पूरा काम  रुक  जाये
पर  उस व्यक्ति को न नहीं कहता , और  अंदर  ही  अंदर  गुस्से  को पी   जाता हु, ताकि उस व्यक्ति को बुरा न लगे !

   और  वो  मेरी  थोड़ी सी प्रशंसा  कर के  चला  जाता  हैं  यार  तुम्हारे  जैसा  कोई  और  नहीं  इस  पुरे  ऑफिस  मैं , मैं  जब  भी  तुम्हारे  पास आता  हुँ, तुम  कभी  भी  न  नहीं  कहते. थैंक यू. और   फिर  अगले  दिन  वही प्रक्रिया.
  लोग  आपकी  भलाई  का  फायदा  उठाने  लग   जाते.
  क्यूंकि  आप  उन्हें न  नहीं  करते,

  भला होना अच्छी    बात  हैं  पर  लोग  आपका फायदा  उठाने  लग  जाते  हैं. न  कहना  कितना  मुश्किल होता हैं  जब  आपके रिलेटिव  आपसे कोई  मदद    मांगते हैं , और  आपको  पता  हैं  आप  उनकी  हेल्प  नहीं  कर  सकते  लेकिन  आप  अगर  न  कह  देंगे  तो   वे  कही  बुरा  न मान  जाये. और  रिश्ते  में  दूरिया  न  बन  जाये  इस डर  से  बचने  के  लिए  आप  उनकी  सहायता  तो   कर  देते  हैं  पर   बाद    में  अपने आप  को  मुश्किल  में   डाल  लेते हैं   हैं . आप   अपने  रिलेटिव की  मदद  तो  कर  देते  हैं. पर  अपने आप  को   मुश्किलों  में  घिरे पाते   हैं.

  हमे  बचपन से  ही  सिखाया  जाता हैं  की   दुसरो  की मदद  करनी चाहिए . दुसरो  को  लिए  एक   अच्छा  व्यक्ति
  बनना  चाहिए. लेकिन  जब  हम बड़े  होते  हैं  तो इसी   अच्छाई  का  लोग  फायदा  उठाने   लग  जाते  हैं , और  हम  अंदर  ही ह अंदर  घुटने  लग  जाते  हैं .

   मान लीजिये  आपका  कोई  प्यारा मित्र   आपको  फ़ोन  करके  कहे  यार आज  मूवीज देखने चले  और  आप घर  पर  बैठ  कर   अपनी फॅमिली  के साथ   समय बिता  रहे  हो  और  आप  नहीं जाना  चाहते, और आपका दोस्त   कहे     घर  तो  रोज ही रहता  हैं. कभी  दोस्तों  के  साथ  भी  चल  लिया  कर और  अब  आप  असमंजस  में  पड़  जाते हैं  के  किसे  न कहे  और किसे हाँ  कहे . अगर  दोस्त  को  मना   करता हुँ  तो  वो   बुरा  मान  जाता हैं  . अगर   घर मैं  बोलता  हूँ , में  मूवी  देखने  के  लिए  दोस्त के  साथ जाऊ,  तो  फॅमिली  बुरा  मान  जाती  हैं. और  आप  बिना  किसी  से  बात  किये  अपने  आप   को  कोसने लगते  हैं. और  चुप  चाप  जाकर कमरे  में  सो जाते  हैं  या   टीवी देखने  लग  जाते, और आपके  अंदर  गुस्सा घर कर लेता हैं फिर  या  तो  घर  पर   अपना  गुस्सा   निकालते   हैं . या  फिर  दोस्त  पर गुस्सा  निकालते   हैं. कुछ भी गलत  होता  हैं  तो  अपने  आप  को  ही दोषी   मानते  हैं, न  कहना आपको  असंभव  लगता हैं.

तो क्या  करे  की इन सब  परेशनियो  से  बाहर  निकल सके.
  सबसे  पहले   दुसरो  के  बारे  मैं  सोचना बंद  कीजिये की  मैं   अगर  उनको  न  कहूंगा  तो  उन्हें  बुरा  लगेगा. और  मेरी जो  एक  अच्छी  छवि  बनी हैं  उनकी  नज़र  में  बुरी  बन  जाएगी.
  न  कहना  सीखिए  जिससे  आपके  अंदर  एक  कॉन्फिडेंस आएगा और  अपने  आप  को  कोसना  बंद  करना सिख  जायेंगे. न कहने से  आपकी कोई  छवि  नहीं  बिगड़ेगी. बल्कि  लोग  आप  फायदा   उठाना  बंद  कर  देंगे और आप   अपने  काम  को  भी  सही  समय  पर  पूरा  कर पाएंगे!
 

उम्मीद हैं आपको पोस्ट पसंद आई होगी.

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