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Speak less, more people will listen and if you speak more, no one will listen,

Speak less, more people will listen and if you speak more, no one will listen,

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Hello World


How much to speak and when

If you also have a habit of speaking more, without having any means to keep your opinion in any discussion, then how harmful it can be for you,
There is a small article on this, how important it is to speak less and what is the disadvantage of speaking more.

They say, do not say less, more people will listen and if you speak more, no one will listen,

Some people try to speak as much as possible in order to impress others so that they come in the eyes of people in some way and they show themselves to be more intelligent. But in reality it is not so, if you speak very little It is believed that you will speak very thoughtfully and measured. Anyway, influential people are able to influence others only because of speaking less and can maintain their dominance.

Keep in mind that the more you speak, the more you are expected to talk stupid. This is a very accurate way to differentiate yourself from others and to be more intelligent or influential, because when you remain silent, people have an increased eagerness towards you and more powerful than you are. Huh.

People end up speaking your silence and go on speaking themselves because it is human nature that when he lives in the society, it becomes in his habit to talk to each other or exaggerate things. They want to know that What are you thinking When you control that you have to speak what is necessary. So you stop yourself from saying any thing of your mind and like ordinary people, exaggerate things and like to listen in the same way,

Seeing you speak less, believe only those things that you say to them, that is, by speaking less, thinking, understanding, thinking, you can make sure that what you have to say and what secret is to be kept!

Make a habit of speaking at least, when you give a short answer or remain silent then they say something to complete your silence and when you speak, you also reveal some important information about yourself. This also shows their weakness!

Whatever you say about yourself should be very brief as per your wish, what you have to say and what is to be kept secret. In other words, if you keep silent, then you become more powerful, full of mystery.

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Speak less, more people will listen and if you speak more, no one will listen,

हेलो वर्ल्ड
कितना बोलना हैं और कब

अगर  आपको भी   ज्यादा  बोलने की   आदत  हैं   बिना मतलब किसी   भी चर्चा  में   अपना  मत  रखने की आदत  है  तो  ये  आपके  लिए  कितनी  नुक्सान दायक हो सकती    हैं   ,
इसी  पर एक   छोटा सा लेख हैं  के  कम बोलना  कितना  जरुरी  हैं  और    ज्यादा  बोलने से  क्या  नुक्सान हैं .

कहते  हैं न  कम   बोलो   ज्यादा  लोग  सुनेंगे  और  ज्यादा बोलोगे  तो  कोई नहीं  सुनेगा ,

  कुछ  लोग दूसरों को प्रभावित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा बोलने की कोशिश करते हैं ताकि वे किसी ना किसी तरह से लोगों की नजर में आएं और वे खुद को ज्यादा बुद्धिमान दर्शाएं।लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है,  यदि आप बहुत कम बोलते हैं तो यह माना जाता है कि आप बहुत सोच समझकर और नपा तुला ही बोलेंगे।  वैसे भी प्रभावशाली लोग कम बोलने के कारण ही दूसरों को प्रभावित कर पाते हैं और अपना दबदबा कायम रख सकते हैं । 

ख्याल रखें कि आप जितना अधिक बोलेंगे,आपसे उतना ही अधिक बेवकूफी की बातें करने का अंदेशा रहता है। दूसरों से खुद को अलग और ज्यादा बुद्धिमान या प्रभावशाली दिखाने का यह बहुत सटीक तरीका है, क्योंकि जब आप चुप रहते हैं तो लोगों के मन में आप के प्रति  उत्सुकता  बढ़  जाती है और आप जितना अधिक शक्तिशाली हैं,  उससे कहीं अधिक लोगों को महसूस होते हैं।

लोग आप की चुप्पी को खत्म कर के,  खुद बोलते जाते हैं क्योंकि यह इंसानी फितरत है कि वह जब समाज में रहता है, तो एक दूसरे से बातचीत करना या बातों को बढ़ा चढ़ाकर करना उसकी आदत में शुमार हो जाता है वे जानना चाहते हैं कि आप क्या सोच रहे हैं? जब आप इस बात पर नियंत्रण कर लेते हैं कि आपको वो ही बोलना है, जो बोलना जरूरी है। तो आप अपनी मन की कोई भी बात कहने से खुद को रोक लेते हैं और जैसे कि आम लोग, बातों को बढ़ा चढ़ाकर कहते हैं और उसी प्रकार सुनना भी पसंद करते हैं,

आपको कम बोलते हुए देखकर सिर्फ उन्हीं बातों पर ही यकीन करते हैं जो आप उन्हें कहते हैं यानी आप कम बोलकर, सोचकर, समझकर, विचार कर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपको क्या बात कहनी है और क्या रहस्य बनाए रखना है!

कम से कम बोलने की आदत डालें, जब आप संक्षिप्त उत्तर देते हैं या फिर चुप ही रहते हैं तो वे आप की चुप्पी को पूरा करने के लिए कुछ बोलते  हैं और जब बोलते हैं तो अपने बारे में कुछ ना कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी जाहिर कर देते हैं इससे उनकी कमजोरी का भी पता चल जाता है!

आप अपने बारे में जो भी बोले वह बेहद संक्षिप्त हो आपकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, कि आपने क्या बोलना है और किस बात को रहस्य बनाए रखना है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आप चुप रहते हैं, तो आप ज्यादा रहस्य से भरे, शक्तिशाली हो जाते हैं।  

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थैंक यू ….

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